लोगों से मैंने कोई भी शिकवा नहीं किया (ग़ज़ल) - अविनाश बन्धु
लोगों से मैंने कोई भी शिकवा नहीं किया जो भी है सामने है दिखावा नहीं किया माना कि क…
लोगों से मैंने कोई भी शिकवा नहीं किया जो भी है सामने है दिखावा नहीं किया माना कि क…
एक वादा मुझे निभाना था, उसके ही साथ घर बसाना था। सात फेरे लिए थे जीवन के, साथ महबूब …
दिल में अब आरज़ू जगाया कर, ग़म मिलें फिर भी मुस्कुराया कर। लाल इतनी हुई हैं क्यों आँ…
प्यार उठा कर लाए हो मयख़ाने में और वफ़ा तुम ढूँढ रहे पैमाने में इतना ज़ुल्म किया है …
संजोए हैं मेरे पुरखों ने जो जज़्बात हिंदी में, सदा महका करेंगे बनके वो सौग़ात हिंदी म…
चंद पन्नों का अख़बार है ज़िंदगी कुछ बरसों की सरकार है ज़िंदगी हम-से दुनियावी मुजरिमो…
फिर ख़्वाब हसरतों का सजा कर तो देखिए पूरा ख़ुदा करेगा, दुआ कर तो देखिए राहों में मुश…
साथ जीना है तो चलिए यूॅं ही साया बनकर उम्र भर रहना मेरी ऑंख का तारा बनकर जो अज़ीज़…
बिखरी हुई ज़ुल्फ़ों को घटा किसने कहा था मग़रूर निगाहों को नशा किसने कहा था आशिक था, …
हसीन शाम का मंज़र भी ख़ूब हो जाए, उदास रात का तेवर भी ख़ूब हो जाए। चलो बुझाते हैं दर…
कमी मोहन की राधे को खली है, हुई बेचैन बेहद बावली है। न पौरुष को कभी आँका मुरारी, जवा…
चलो हम आज अपने ही घरों की बात करते हैं छिपे हैं जो दिलों में उन डरों की बात करते ह…
ज़िंदगी का फ़ैसला फिर जो भी हो! साथ मेरे है ख़ुदा फिर जो भी हो! घूँट तो पीने ही होंगे उ…
क्या है गुनाह यार, बताया न जाएगा, तू साँस में बसा है, भुलाया न जाएगा। तेरा कसूर कुछ …
वो दिल कहाँ से लाएँ, वो नज़र कहाँ से लाएँ, मिट जाएँ जो वतन पर, वो जिगर कहाँ से लाएँ।…
तुम नहीं, हम नहीं, कमी सी है, इन क़तारों में, कुछ नमी सी है। यह तन्हाई कभी तो होगी त…
खा के मोटा अपना अब वो तन कर रहे हैं, हमने सुना है कि वो गबन कर रहे हैं। आते नहीं हैं…
बड़ी ही ख़ामुशी से चुपके-चुपके दिल चुरा लेंगे, हमारा वादा है एक दिन तुम्हें अपना बना…
अपनी मेहनत से मुअत्तर है बगीचा अपना, हम हैं मज़दूर, महकता है पसीना अपना। राह हमवार न…
मेले में अब खिलौने खरीदे नहीं गए, मजबूर बाप देख के रोने नहीं गए। ज़ाहिर न हो कि चाहत…